[ थोड़ा अपनों का, थोड़ा गैरों का ] [डायरी एक अजीब से शख्स की ] दहलीज़ पर हूँ, , भूत और भविष्य की दहलीज़ पर हूँ, , , पक्ष और विपक्ष की
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डायरी : 2 October 2020
कुछ समय से मुलाकातें टलती रही या टाल दी गई लेकिन कल फोन आया तो यूँ ही मैं निकल गया मिलने। किसी चीज़ को जीने में मजा तब आता है जब उसको पाने ...
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वक्त, वक्त पर बदलता रहता है । कभी इसका, कभी उसका होती रहता है ।। जवानी के सपने में भी , मुहब्बत का दर्द देता रहता है ।। सुनहरे बा...
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डिब्बे में डिब्बा, डिब्बे में लस्सी । सबसे प्यारी तेरी हँसी ।। ऐसी नादान शायरियाँ बनाता था तब , फिर भी न जाने क्यों ग़ालिब, फ़ैज को प...
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