[ थोड़ा अपनों का, थोड़ा गैरों का ] [डायरी एक अजीब से शख्स की ] दहलीज़ पर हूँ, , भूत और भविष्य की दहलीज़ पर हूँ, , , पक्ष और विपक्ष की
Saturday, 3 October 2020
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डायरी : 2 October 2020
कुछ समय से मुलाकातें टलती रही या टाल दी गई लेकिन कल फोन आया तो यूँ ही मैं निकल गया मिलने। किसी चीज़ को जीने में मजा तब आता है जब उसको पाने ...
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कुबेर तो नहीं कुबेर सा खजाना हैं, पापा आसमान तो नहीं आसमान सा छत हैं, पापा पहलवान तो नहीं पहलवान से रक्षक हैं, पापा खुदा तो नहीं ...
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विज्ञान कहती है कि आँधी वायु दाब की असमानता के कारण आती है तो मैं ठहरा विज्ञान का विद्यार्थी, तेरे अहसास को भी प्रकृति से जोड़ने लगा , उस...